आध्यात्मिक राष्ट्रवाद सदस्य

शनिवार, 6 मार्च 2010

देशभक्तों की चौपाल

एक राष्ट्र के नागरिकों के विचार ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है, विचारों के आन्दोलन से ही भौतिक आन्दोलनों का प्रारंभ होता है, जिससे राष्ट्र की समस्याओं का समाधान होता है और राष्ट्र प्रगति की ओर अग्रसर होता है, परन्तु यदि राष्ट्रहित के विचारों का उदय ही ना हो या हो भी तो उन विचारों में मतभेद हो तो राष्ट्र का पतन होना आरम्भ हो जाता है, राष्ट्र प्रेम तो सबमें होता है, परन्तु विचारों के मतभेद के कारण राष्ट्र प्रगति की ओर कदम बढ़ा कर भी आगे नहीं बढ़ पाता और पाकिस्तान जैसी समस्याएं देश को विभाजित कर देती हैं. आज का पाकिस्तान वैचारिक मतभेद का ही एक उदाहरण है. देशप्रेम जब स्वार्थ, उपराष्ट्रवाद, प्रांतवाद, भाषावाद, धार्मिक कट्टरता, जातीय विखंड़ता, वोट बैंक की राजनीति, धर्म के नाम पर व्यवसाय आदि विभिन्न प्रकार के नकारात्मक विचारों प्रभावित हो रहा तो इस परिस्थिति में राष्ट्र के नागरिकों के विचारों का समन्वय अति आवश्यक है, राष्ट्रहित के कई विचार हमारे मन में जागृत हो कर समाप्त हो जातें है, यदि सभी प्रकार के सकारात्मक, राष्ट्रभावानाभावित विचारों को हम राष्ट्रहित के पथ मोड़ दें तो हमारा देश विश्व का सिरमौर बन सकता है, यहाँ के सभी नागरिक खुशहाल हो सकतें हैं, इसी क्षेत्र में देशभक्तों की चौपाल के माध्यम से हम छोटा सा प्रयास कर रहें है (प्रत्येक देशभक्त इस चौपाल पर अपना मत अवश्य रखे)

1 टिप्पणी:

  1. उपरोक्त विचारों से सहमत हूँ. राष्ट्रीयता की अलख जगाये रखिये..

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अभी और बहुत-सी महान उपलब्धियां और विजयोत्सव हमारी प्रतीक्षा में हैं