आध्यात्मिक राष्ट्रवाद सदस्य

शनिवार, 10 अप्रैल 2010

गौमाता को मारना मुसलमानों के लिए आवश्यक है @


अक्सर गोवंश की हत्या और गौहत्या के लिए मुसलमानों को जोड़कर देखा जाता है, तथा यह भ्रान्ति फैलाई जाती है कि धार्मिक कार्यों के तहत गौमाता को मारना मुसलमानों के लिए आवश्यक है, परन्तु इस बात में कोई सच्चाई नहीं है !

सबसे बड़ा तथ्य तो यह है कि जब अरब देशों में जहाँ इस्लाम का जन्म हुआ वहाँ गाय होती ही नहीं !

फिर धार्मिक बंदिश के तहत गाय की कुर्बानी को कैसे आवश्यक बताया जा सकता है?

इस्लाम धर्म के हदीस में कहा गया है कि गाय के गोस्त (मांस) से कई तरह की बीमारियाँ होती हैं, तथा गाय का दूध - दवाई और गाय का घी रसायन है ! पैगम्बर मुहम्मद साहब नाशियातहादी ग्रन्थ में कहते हैं कि गाय का दूध और घी तुम्हारी तंदुरुस्ती के लिए बहुत अच्छा और जरूरी है, किन्तु गाय का मॉस नुकसान करने वाला है !

कुरान में गोकुशी (गोहत्या) करना आवश्यक विधि नहीं है ! इतिहास साक्षी है कि पहले मुग़ल शासक बाबर ने अपने पुत्र हुमायूं को गोवाश की हत्या न करने के सम्बन्ध में पत्र लिखकर कहा था कि तुम अपने शासन में कभी गोवंश की हत्या न होने देना तथा सदा गाय की हिफाजत करना ! अकबर जैसे उदार शासक ने सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) को भली प्रकार समझा, अत्यधिक प्रभावित भी हुआ और अपने शासनकाल में गोहत्या पर पाबन्दी लगाई ! औरंगजेब तो इस्लाम के विषय में ही भ्रमित था और पूरी तरह शाकाहारी था ! इतना ही नहीं अकबर और औरंगजेब तो सदा पीने के लिए गंगाजल को ही पसंद करते थे !

अनेक मुग़ल शासकों के शासन काल में गौवंश की हत्या पूर्ण: बंद थी ! बहादुर शाह जफ़र ने तो हिन्दुओं के साथ प्रेम की मिशाल कायम की दिल्ली का लालकिला मैदान उन्ही के द्वारा हिन्दुओं को प्रदान किया गया, उन्होंने ही सर्वप्रथम रावण का पुतला दहन करवाया और तो और उनके राज्य में तो ईद के दिन पहरा रहता था, ताकि कोई गाय का क़त्ल न कर दे ! कश्मीर जैसे मुस्लिम प्रधान राज्य में भी गोवंश हत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध था !

मुग़ल शासन के पतन और साथ ही साथ दुनिया भर में औद्योगिक संस्कृति का प्रचार बढ़ता गया, और पूरे विश्व में साम्राज्यवाद भी बढ़ने लगा, जिसके कारण बहुत से राष्ट्र गुलाम हो गए ! हमारे देश पर भी अंग्रेजों ने अधिकार जमा लिया, भारत भी अंग्रेजों का गुलाम हो गया ! लगातार बढ़ते मशीनीकरण ने हमारे हमारे उद्योगों को बर्बाद किया, भारतीय मानस के विचार शक्ति को भी पतन की और ढकेल दिया और शुरू हुआ भारतीय पतन का युग ! मशीनी युग में प्राकृतिक उपहारों का उपयोग समाप्त होने लगा और प्रकृति का शोषण आरम्भ हो गया जो आज भी निरंतर जारी है !

जो पशु कभी मानव के मित्र और सहयोगी हुआ करते थे, उन पशुओं का भी उत्पाद की संज्ञा दी जाने लगी ! इस अवस्था में अन्धकार युग से आये अंग्रेजो के हाथ लगी भारतीय गाय और उसका वंश क्योंकि उस समय भारत में इनका बाहुल्य था ! अंग्रेजों के शासनकाल में गाय-बैलों का दुर्दांत क़त्ल आरम्भ हुआ और गोवंश का मांस, चमडा, सींग, हड्डियाँ आदि का एक व्यवसाय बन गया ! ब्रिटिश फ़ौज में गोमांस पूर्ति के के लिए गौमाता को क़त्ल करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने मुस्लिम कसाइयों को इस धंधे में लगाया ताकि हिन्दू-मुसलामानों का आपस में बैर बढे और उनकी ** फूट डालो शासन करो ** वाली नीति कामयाब हो ! भारतीय गरीब दूध न देने वाली गौमाता को तथा पश्चिमी उपकरणों के सामने कमजोर पड़े, गोवंश को बेचने के लिए विवश था और लोभी इसका लाभ उठाने के लिए विवश थे !

देश का महान दुर्भाग्य तब सामने आया जब कुछ स्वार्थी और पथभ्रष्ट हिन्दुओं ने समाज को भ्रमित करने के लिए गौमाता को सामान्य पशु कह डाला और कहीं ना कहीं हिन्दुओं ने भी गो-रक्षा से मुहं मोड़ लिया ! जिस पवित्र भावना को इस्लामी शासक न समाप्त कर सके, उसी परम भावना को, श्रद्धा को, हिन्दुओं में पैदा होने वाले अंग्रेजों और स्वार्थी नेताओं ने अपने ही हाथों समाप्त कर डाला ! भारतीय संस्कृति की आधारभूत व्यस्था हमारे स्वार्थ के कारण समाप्ति की कगार पर चली गयी !

भारत की उन्नति और प्रगति का स्रोत गोवंश ही रहा ! इसे खोकर केवल मशीनों के गुलाम बनकर हम भारत को आगे नहीं ले जा सकते, हमें नैतिकता और प्रकृति से मित्रता की आवश्यकता है !

पढ़ने वाले सभी हिन्दुओं से अनुरोध है कि यदि आप गोवंश की खरीद फ़रोख्त होते देखतें है, और बेंचने वाला अगर हिन्दू है तो उसे गौ की महिमा समझाएं , क्योंकि मुसलमान भाई से पूछो की भैया तुम गाय और गोवंश को क्यों काटते हो तो भाईजान सीधा उत्तर देते हैं - कि आप बेंचते क्यों हो ! आप बेंचते हो तो हम काटते है !!#

मुसलमान पाठकों से भी अनुरोध है की वे गौ-हत्या रोकने में सहयोग करें, केवल इसी कदम से ही हिन्दू-मुसलमान एकता स्थापित हो जायेगी अत्यधिक प्रयास तो करना ही नहीं पड़ेगा !

कुछ तुम चलो, कुछ हम चले, मंजिल नजर आएगी ^ और अदि साथ - साथ चले तो मंजिल तक निश्चित ही पहुँच जायेंगे !

अगले पाठ में कुरान और गौ-हत्या के विषय में चर्चा करेंगे ***!! किस तरह इस्लाम को बदनाम और मुसलमानों को गुमराह किया गया !!++==

सर्वदेवमयी गऊमाता की पुकार से प्रेरित - (पंकज सिंह राजपूत के कुंजीपटल द्वारा)

!!!!! बस एक ही धुन जय-जय भारत !!!!!!!

16 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ तुम चलो, कुछ हम चले, मंजिल नजर आएगी ^ और अदि साथ - साथ चले तो मंजिल तक निश्चित ही पहुँच जायेंगे !

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  2. Bahut hi acchi bat kahi hai aapne. kuch bewakuf log hain jo gay ko kasaiyon ke hath bech dete hain. isme musalmano se jyada dosh hinduwo ka hain.

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  3. अब तो विग्यान भि मानने लगा है कि गो वंश मनुश्य के लिये अति हित्कर है इसी लिये इस कि रक्शा को धार्मिक् महत्व मिल है
    आप ने अच्छे तथ्य दिये है
    वेद व्यथित

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  4. bahut sundar

    achi jankari he


    shekhar kumawat

    http://kavyawani.blogspot.com/

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  5. aapke is saargarbhit aalekh se puri tarah se sahmat!
    aaj aise prayas hi rashtra ko ek sutra mein baandh sakte hain......

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  6. आपसे सहमत
    फ़िरदौस जी, भी इंसानियत और भारतीय संस्कृति की बात कर रही हैं तो आज उन्हें काफ़िर ही घोषित कर दिया गया है. सलीम खान ने अपने ब्लॉग पर पोस्ट लिखकर फ़िरदौस जी पर गंभीर आरोप लगाये हैं. इस्लाम का प्रचार करने वाले सलीम खान कितने सभ्य (असभ्य या जंगली कहना उचित रहेगा) हैं, आपके बारे में लिखी इनकी पोस्ट देखकर ही पता चल जाता है.
    दिमाग़ से पैदल ये कुतर्की भारत को भी तालिबान बनाने पर तुले हुए हैं, जब इन्हें भरतीय संस्कृति से इतनी ही नफ़रत है तो क्यों न यह अरब जाकर ही बस जाए. इस देश को इन जैसे तालिबानियों की ज़रूरत नहीं.

    आज फ़िरदौस जी जैसे मुसलमानों की देश को बहुत ज़्यादा ज़रूरत है, साथ ही उनके अभियान को समर्थन देने की, ताकि और देशभक्त लोग आगे आ सकें !!!

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  7. मुसलमान पाठकों से भी अनुरोध है की वे गौ-हत्या रोकने में सहयोग करें,
    Darul Uloom Deoband ka fatwa hai ki Hindu Bhaiyyon hi Bhawna ke samman ki khatir Cow slaughtering na ki jaye . Bataiyye isse zyada musalman kya sahyog denge ?

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  8. @ DR. ANWER JAMAL Said On ११ अप्रैल २०१० १:१६ AM

    गुरूजी आपकी टिप्पड्डी के लिए धन्यवाद !!
    वैसे तो वन्दे-मातरम ना गाने का फतवा भी दारुल-उलूम ने जारी किया, परन्तु स्वामी रामदेव जी ने तो अगले ही दिन कई मुसलमानों से वन्दे-मातरम गवा दिया !!

    बातों से हकीकत कोसों दूर है !! आप ज्ञानी हैं आशा करता हूँ स्पष्टिकरण की जरूरत नहीं होगी ><

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  9. @ देश का महान दुर्भाग्य तब सामने आया जब कुछ स्वार्थी और पथभ्रष्ट हिन्दुओं ने समाज को भ्रमित करने के लिए गौमाता को सामान्य पशु कह डाला और कहीं ना कहीं हिन्दुओं ने भी गो-रक्षा से मुहं मोड़ लिया ! जिस पवित्र भावना को इस्लामी शासक न समाप्त कर सके, उसी परम भावना को, श्रद्धा को, हिन्दुओं में पैदा होने वाले अंग्रेजों और स्वार्थी नेताओं ने अपने ही हाथों समाप्त कर डाला ! भारतीय संस्कृति की आधारभूत व्यस्था हमारे स्वार्थ के कारण समाप्ति की कगार पर चली गयी !

    सिर्फ गोमाता ही नहीं भारतीयता के हर अंग के साथ यह दुर्गठना गठित हुई है

    अहिंसा ही धर्म,गो-सेवा कर्म-------(http://www.rajasthanpatrika.com/city-news/jaisalmer/31012010/jaisalmer-news/75800.html)

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  10. बाद भाईसाहब अमित जी !!

    आपने लिंक - अहिंसा ही धर्म, गो-सेवा कर्म - देकर महात्मा गांधी जी की याद दिला दी, उनका मानना था की भारत को अहिंसा और गौ-सेवा कर्म की बहुत आवश्यकता है और आगे भी रहेगी !!

    धन्यवाद !!

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  11. achchha blog hai. naam chhipaane ka karan samajh me nahi aayaa . khair, jan kar santosh hogaa ki mai gaay ki hatya, durdasha par ek upanyaa likh rahaa hu.''devnar ke daanav''. ab poora ho gayaa hai. isame maine vistaar se bataayaa hai ki muslim shaasak go hatya ke khilaaf they.

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  12. आप जैसा हिन्दू मुस्लिम भाईचारा रखने वाले दुनिया में बहोत सरे है, इसीलिए हिन्दू मर रहे है. मुसल्मानोको कौन गुमराह कर रहा है ? क्या आपने इनके कुरआन का कभी अभ्यास किया है ? अगर नहीं तो दोबारा करे ओर बादमे ऐसी बाते अपने ब्लॉग पर लिखे. भगवन आपको सद बुद्धि दे !!

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  13. गौ बलि और मांसाहार के विषय में सनातन धर्म में उल्लेख है:-

    ऋग्वेद - (10,16,92) में लिखा है कि:-

    "जो गाय अपने शरीर को देवों के लिए बली दिया करती है, जिन गायों की आहुतियाँ सोम जानते है ,हे इंद्रा! उन गायों को दूध से परिपूर्ण और बच्चेवाली करके हमारे लिए गोष्ठ में भेज दें।"

    ऋग्वेद - (10,85,13) मे घोषित किया गया है:-

    "एक लड़की की शादी के अवसर पर बैलों और गायों की बलि की जाती हैं।"

    ऋग्वेद - (6/17/1) में कहा गया है कि:-

    "इंद्र ने गाय, बछड़ा, घोड़े और भैंस का मांस खाने के लिए उपयोग किया।"

    महर्षि याज्यावल्क्या ने षत्पथ ब्राह्मण - (3,1,2,21) में कहा है कि:-

    "मैं गो-मांस ख़ाता हूँ, क्योंकि यह बहुत नर्म और स्वादिष्ट है।"

    आपास्तंब गृहसूत्रां - (1,3,10) मे कहा गया हैं-

    "गाय एक अतिथि के आगमन पर, पूर्वजों की 'श्रद्धा' के अवसर पर और शादी के अवसर पर बलि किया जाना चाहिए।"

    हिंदू धर्म के सबसे बड़े प्रचारक स्वामी विवेकानंद की पुस्तक "द कम्प्लीट वर्क ऑफ़ स्वामी विवेकानंद" के खण्ड 3, पृष्ठ 536 में इस प्रकार कहा:-

    "तुम्हें जान कर आश्चर्या होगा है कि प्राचीन हिंदू संस्कार और अनुष्ठानों के अनुसार, एक आदमी एक अच्छा हिंदू नही हो सकता जो गोमांस नहीं खाए."

    महात्मा गांधी अपनी पुस्तक 'हिंदू धर्म' के पृष्ठ 120 में कहते हैं:-

    "मैं जानता हूँ कि विद्वान हमें बताते हैं की गाय बलिदान वेदों में उल्लेख किया है।"
    ---------------------------------

    शाकाहार का प्रचार करने वालों और माँसाहार को पाप समझने वालों के लिए गूगली।।

    हिन्दू विधि ग्रन्थ मनुस्मृति पेशे-खिदमत है:-

    मनुस्मृति (अध्याय - 5, पद्य - 30) कहता है:-

    "खाने योग पशुओं के माँस खाने मे कोई पाप नहीं है, क्यूंकि ब्रह्मा ने भक्षण और खाद्य दोनों का निर्माण किया है।"

    मनुस्मृति (अध्याय - 5, पद्य - 35) में उल्लेख है:-

    "(श्राद्ध और मधुपर्क में) तथा विधि नियुक्ति होने पर जो मनुष्य माँस नहीं खाता वह मरने के इक्कीस जनम तक पशु होता है।"

    // यहाँ मक़सद किसी को ठेस पहुँचाना नहीं है केवल अज्ञानता को दूर करना है। //

    उत्तर देंहटाएं
  14. गौ बलि और मांसाहार के विषय में सनातन धर्म में उल्लेख है:-

    ऋग्वेद - (10,16,92) में लिखा है कि:-

    "जो गाय अपने शरीर को देवों के लिए बली दिया करती है, जिन गायों की आहुतियाँ सोम जानते है ,हे इंद्रा! उन गायों को दूध से परिपूर्ण और बच्चेवाली करके हमारे लिए गोष्ठ में भेज दें।"

    ऋग्वेद - (10,85,13) मे घोषित किया गया है:-

    "एक लड़की की शादी के अवसर पर बैलों और गायों की बलि की जाती हैं।"

    ऋग्वेद - (6/17/1) में कहा गया है कि:-

    "इंद्र ने गाय, बछड़ा, घोड़े और भैंस का मांस खाने के लिए उपयोग किया।"

    महर्षि याज्यावल्क्या ने षत्पथ ब्राह्मण - (3,1,2,21) में कहा है कि:-

    "मैं गो-मांस ख़ाता हूँ, क्योंकि यह बहुत नर्म और स्वादिष्ट है।"

    आपास्तंब गृहसूत्रां - (1,3,10) मे कहा गया हैं-

    "गाय एक अतिथि के आगमन पर, पूर्वजों की 'श्रद्धा' के अवसर पर और शादी के अवसर पर बलि किया जाना चाहिए।"

    हिंदू धर्म के सबसे बड़े प्रचारक स्वामी विवेकानंद की पुस्तक "द कम्प्लीट वर्क ऑफ़ स्वामी विवेकानंद" के खण्ड 3, पृष्ठ 536 में इस प्रकार कहा:-

    "तुम्हें जान कर आश्चर्या होगा है कि प्राचीन हिंदू संस्कार और अनुष्ठानों के अनुसार, एक आदमी एक अच्छा हिंदू नही हो सकता जो गोमांस नहीं खाए."

    महात्मा गांधी अपनी पुस्तक 'हिंदू धर्म' के पृष्ठ 120 में कहते हैं:-

    "मैं जानता हूँ कि विद्वान हमें बताते हैं की गाय बलिदान वेदों में उल्लेख किया है।"
    ---------------------------------

    शाकाहार का प्रचार करने वालों और माँसाहार को पाप समझने वालों के लिए गूगली।।

    हिन्दू विधि ग्रन्थ मनुस्मृति पेशे-खिदमत है:-

    मनुस्मृति (अध्याय - 5, पद्य - 30) कहता है:-

    "खाने योग पशुओं के माँस खाने मे कोई पाप नहीं है, क्यूंकि ब्रह्मा ने भक्षण और खाद्य दोनों का निर्माण किया है।"

    मनुस्मृति (अध्याय - 5, पद्य - 35) में उल्लेख है:-

    "(श्राद्ध और मधुपर्क में) तथा विधि नियुक्ति होने पर जो मनुष्य माँस नहीं खाता वह मरने के इक्कीस जनम तक पशु होता है।"

    // यहाँ मक़सद किसी को ठेस पहुँचाना नहीं है केवल अज्ञानता को दूर करना है। //

    उत्तर देंहटाएं
  15. गौ बलि और मांसाहार के विषय में सनातन धर्म में उल्लेख है:-

    ऋग्वेद - (10,16,92) में लिखा है कि:-

    "जो गाय अपने शरीर को देवों के लिए बली दिया करती है, जिन गायों की आहुतियाँ सोम जानते है ,हे इंद्रा! उन गायों को दूध से परिपूर्ण और बच्चेवाली करके हमारे लिए गोष्ठ में भेज दें।"

    ऋग्वेद - (10,85,13) मे घोषित किया गया है:-

    "एक लड़की की शादी के अवसर पर बैलों और गायों की बलि की जाती हैं।"

    ऋग्वेद - (6/17/1) में कहा गया है कि:-

    "इंद्र ने गाय, बछड़ा, घोड़े और भैंस का मांस खाने के लिए उपयोग किया।"

    महर्षि याज्यावल्क्या ने षत्पथ ब्राह्मण - (3,1,2,21) में कहा है कि:-

    "मैं गो-मांस ख़ाता हूँ, क्योंकि यह बहुत नर्म और स्वादिष्ट है।"

    आपास्तंब गृहसूत्रां - (1,3,10) मे कहा गया हैं-

    "गाय एक अतिथि के आगमन पर, पूर्वजों की 'श्रद्धा' के अवसर पर और शादी के अवसर पर बलि किया जाना चाहिए।"

    हिंदू धर्म के सबसे बड़े प्रचारक स्वामी विवेकानंद की पुस्तक "द कम्प्लीट वर्क ऑफ़ स्वामी विवेकानंद" के खण्ड 3, पृष्ठ 536 में इस प्रकार कहा:-

    "तुम्हें जान कर आश्चर्या होगा है कि प्राचीन हिंदू संस्कार और अनुष्ठानों के अनुसार, एक आदमी एक अच्छा हिंदू नही हो सकता जो गोमांस नहीं खाए."

    महात्मा गांधी अपनी पुस्तक 'हिंदू धर्म' के पृष्ठ 120 में कहते हैं:-

    "मैं जानता हूँ कि विद्वान हमें बताते हैं की गाय बलिदान वेदों में उल्लेख किया है।"
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    शाकाहार का प्रचार करने वालों और माँसाहार को पाप समझने वालों के लिए गूगली।।

    हिन्दू विधि ग्रन्थ मनुस्मृति पेशे-खिदमत है:-

    मनुस्मृति (अध्याय - 5, पद्य - 30) कहता है:-

    "खाने योग पशुओं के माँस खाने मे कोई पाप नहीं है, क्यूंकि ब्रह्मा ने भक्षण और खाद्य दोनों का निर्माण किया है।"

    मनुस्मृति (अध्याय - 5, पद्य - 35) में उल्लेख है:-

    "(श्राद्ध और मधुपर्क में) तथा विधि नियुक्ति होने पर जो मनुष्य माँस नहीं खाता वह मरने के इक्कीस जनम तक पशु होता है।"

    // यहाँ मक़सद किसी को ठेस पहुँचाना नहीं है केवल अज्ञानता को दूर करना है। //

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  16. गौ बलि और मांसाहार के विषय में सनातन धर्म में उल्लेख है:-

    ऋग्वेद - (10,16,92) में लिखा है कि:-

    "जो गाय अपने शरीर को देवों के लिए बली दिया करती है, जिन गायों की आहुतियाँ सोम जानते है ,हे इंद्रा! उन गायों को दूध से परिपूर्ण और बच्चेवाली करके हमारे लिए गोष्ठ में भेज दें।"

    ऋग्वेद - (10,85,13) मे घोषित किया गया है:-

    "एक लड़की की शादी के अवसर पर बैलों और गायों की बलि की जाती हैं।"

    ऋग्वेद - (6/17/1) में कहा गया है कि:-

    "इंद्र ने गाय, बछड़ा, घोड़े और भैंस का मांस खाने के लिए उपयोग किया।"

    महर्षि याज्यावल्क्या ने षत्पथ ब्राह्मण - (3,1,2,21) में कहा है कि:-

    "मैं गो-मांस ख़ाता हूँ, क्योंकि यह बहुत नर्म और स्वादिष्ट है।"

    आपास्तंब गृहसूत्रां - (1,3,10) मे कहा गया हैं-

    "गाय एक अतिथि के आगमन पर, पूर्वजों की 'श्रद्धा' के अवसर पर और शादी के अवसर पर बलि किया जाना चाहिए।"

    हिंदू धर्म के सबसे बड़े प्रचारक स्वामी विवेकानंद की पुस्तक "द कम्प्लीट वर्क ऑफ़ स्वामी विवेकानंद" के खण्ड 3, पृष्ठ 536 में इस प्रकार कहा:-

    "तुम्हें जान कर आश्चर्या होगा है कि प्राचीन हिंदू संस्कार और अनुष्ठानों के अनुसार, एक आदमी एक अच्छा हिंदू नही हो सकता जो गोमांस नहीं खाए."

    महात्मा गांधी अपनी पुस्तक 'हिंदू धर्म' के पृष्ठ 120 में कहते हैं:-

    "मैं जानता हूँ कि विद्वान हमें बताते हैं की गाय बलिदान वेदों में उल्लेख किया है।"
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    शाकाहार का प्रचार करने वालों और माँसाहार को पाप समझने वालों के लिए गूगली।।

    हिन्दू विधि ग्रन्थ मनुस्मृति पेशे-खिदमत है:-

    मनुस्मृति (अध्याय - 5, पद्य - 30) कहता है:-

    "खाने योग पशुओं के माँस खाने मे कोई पाप नहीं है, क्यूंकि ब्रह्मा ने भक्षण और खाद्य दोनों का निर्माण किया है।"

    मनुस्मृति (अध्याय - 5, पद्य - 35) में उल्लेख है:-

    "(श्राद्ध और मधुपर्क में) तथा विधि नियुक्ति होने पर जो मनुष्य माँस नहीं खाता वह मरने के इक्कीस जनम तक पशु होता है।"

    // यहाँ मक़सद किसी को ठेस पहुँचाना नहीं है केवल अज्ञानता को दूर करना है। //

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अभी और बहुत-सी महान उपलब्धियां और विजयोत्सव हमारी प्रतीक्षा में हैं