आध्यात्मिक राष्ट्रवाद सदस्य

सोमवार, 12 अप्रैल 2010

किसी ने क्यों और कैसे कहा कि हनुमान जी आतंकवादी थे

गुरूजी (http://vedquran.blogspot.com/)
पिछली पोस्ट में कहकर निकल गए मुरीद द्वारा लिखे गए विचारों पर गौर करें "दया करके"

अब इतिहास की सुनिये -
रावण स्वर्ग पर हमला करके इन्द्र और कुबेर को पकड़ लाया । रावण किसका पुजारी था ?
वह किस जाति का था ?

इस्लाम की कौन सी किताब में लिखा है की जब आप के पास लड़ने के लिए धन ना हो तो हरामी करके दूसरों के घर लूट लो -
महमूद, तैमूर आदि ने इस्लाम को दरकिनार कर ऐसा क्यों किया ?

छोटा सा उत्तर है - स्वार्थवश, महत्वाकांक्षावश, और अभिमानवश !!

उन्हें यह बात समझ क्यों नहीं आई की बन्दे तो सब खुदा के ही हैं चाहे वे उसे माने या ना माने ! उन्हें इस्लाम इतना भी ना समझा सका की फिक्र ना कर
तेरे हिस्से की रोटी मैं तुझे जरूर दूंगा, मुझमें विश्वास रख !! याद कीजिये की कोई भारतीय कभी किसी का घर - बार लूटने नहीं गया, महाराजा रणजीत सिंह इरान तक गए पर कोई घर लूटा - नहीं, क्योंकि वो अरबों की भांति लुटेरे नहीं थे, ना ही वो निराकार को आँख का अंधा मानकर उसके नाम पर मानव विरोधी काम करते थे, वे बस केवल सोमनाथ मंदिर का दरवाजा और तख्ते - तोउस और भारत से लुटे गए सामानों को लेकर वापस आ गए !!

महमूद, तैमूर, नादिरशाह आदि जिस तरह श्रेठ (आपकी और मेरी नजर में) इस्लाम में पैदा होकर भी स्वार्थवश, महत्वाकांक्षावश, और अभिमानवश इस्लाम विरोधी सारे काम किये !! ठीक उसी तरह श्रेष्ठ कुल और जाति में पैदा होकर, महान शिवभक्त होकर भी रावण - स्वार्थवश, महत्वाकांक्षावश, और अभिमानवश धर्म विरुद्ध कार्य का बैठा ! रावण के उद्धार तथा उसकी जाति को सुमार्ग पर चलाने के लिए तो स्वयं भगवान् आ गए, लेकिन अरबी लुटेरे तो कुत्ते की मौत ही मरे, उनके वंशज भी इस्लाम का दिन-दिन पर मतियामेल करते चले गए लेकिन कोई ईशदूत नहीं आया !!


हनुमान जी ने कोटि कोटि लंकावासियों को जला डाला । वे जलने वाले किस धर्म के थे ? और वे मासूम नागरिक किस जुर्म में जलाये गये ?वह जलाने वह किस धर्म का था ?

रामचरितमानस (सुन्दरकाण्ड) - साधु अवग्या कर फलु ऐसा |
जरइ नगर अनाथ कर जैसा ||
ज्ञानी पुरूषों को अधिक समझाना तो स्वयं मूर्खता है, ज्ञानी तो समझ ही चुका है बस केवल नासमझ बनकर अपने अभिमान को पराजित कर रहा है !!!

राक्षस आये दिन विश्वामित्र के यज्ञों में विध्वंस करते रहते थे ?

सतयुग में भी हथियारों के प्रयोग और रक्तपात का विवरण मिलता है । तब तो मुसलमान लफ़्ज़ तक आर्यावर्त में न मिलता था । हर चीज़ में महानता का टाइटिल हथियाने वालो अब बताओ कि सबसे प्राचीन और सबसे बड़ा आतंकवादी कौन है ?

राक्षस तो सतयुग में भी थे # राक्षस अर्थात स्वार्थी, अति- मह्ह्त्वाकांक्षी, अंहकारी (अर्थात जो वे करते हैं वहीँ उचित है, बाकी सबका तो उस परमपिता परमेश्वर के विरूद्ध है) !!
अब ज़रा ध्यान दीजिये की ये राक्षस जो सतयुग से लेकर द्वापर तक सनातन धर्मी थे, उन्होंने इस्लाम को ही अपना शिकार क्यों बना लिया, इसका सीधा सा मतलब निकलता है कि इस्लाम को बर्बाद (बदनाम) करके ही ये राक्षस विश्वामित्र के यज्ञों (मानव कल्याण के यज्ञों) को बाधित करना चाहते हैं !

हर जगह खुद को महान कहना भी तो उचित नहीं है !

धर्म के कीड़े ना बनिए !! उस परमपिता की व्यस्था परिपूर्ण है !! एक बात समझिये की हम उसी की संतान हैं, चाहे पहले पैदा हुए उसे पिताजी अथवा बाबूजी कहें या बाद वाले पापा और नहीं तो डैड !!

# आइये राष्ट्र धर्म अपनाएं राष्ट्र जोड़े, धर्म के नाम पर अतीत के छाये में भविष्य के वृक्ष ना रोपे #

आपका करुणापात्र - पंकज सिंह राजपूत

!!!!!!!!! बस एक ही धुन जय-जय भारत !!!!!!!!!!!

17 टिप्‍पणियां:

  1. आइये राष्ट्र धर्म अपनाएं राष्ट्र जोड़े, धर्म के नाम पर अतीत के छाये में भविष्य के वृक्ष ना रोपे

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  2. bahut khub

    जय जय हनुमान

    http://kavyawani.blogspot.com/
    shekhar kumawat

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  3. Ye samjhe is bat ko tab naa. janwaro ka mans kha -kha karke ye bhi janwar ho gaye hain.

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  4. जय भारत के चक्कर में आप हनुमान जी के बारे में फ़ालतू बातें न करें। उनकी बुराई तो अल्ला मियाँ को भी पसंद नहीं।

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  5. बात गोल गोल घूम कर रह गई.. अपनी समझ जरा छोटी है शायद..

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  6. aadrniy hnoomaan ji ko aatnkvaadi kehna yaa likhnaaa hindu dhrm ki aasthaaon ka apmaan he plz. is bhool ko sudhaar len . akhtar khan akela kota rajasthan

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  7. अबे चूतिए। तू नास्तिक है तो रहे आ। तूने बजरंगबली की शान में गुस्ताखी कर दी है। तैयार रह तुझे हम बजरंगदल वाले अब घेर कर मारेंगे। एफ़ आई आर तो दर्ज हो ही चुकी है। वक़ील भी लगा दिए गए हैं तेरे पीछे और तेरी यह पोस्ट ही तुझे जेल की चक्की भी पिसवाएगी। मत घबरा मत घबरा । बस ज़रा देर और है तेरी मट्टी पलीद होने में।

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  8. बेनामी Said On १२ अप्रैल २०१० १०:०२ PM

    अबे चूतिए। तू नास्तिक है तो रहे आ। तूने बजरंगबली की शान में गुस्ताखी कर दी है। तैयार रह तुझे हम बजरंगदल वाले अब घेर कर मारेंगे। एफ़ आई आर तो दर्ज हो ही चुकी है। वक़ील भी लगा दिए गए हैं तेरे पीछे और तेरी यह पोस्ट ही तुझे जेल की चक्की भी पिसवाएगी। मत घबरा मत घबरा । बस ज़रा देर और है तेरी मट्टी पलीद होने में।

    Thankyou Very Much for come and write.

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  9. @ आदरणीय बेनामी जी .......... बजरंगदल वीर भारतीयों का दल है, जिसका सदस्य कभी बेनामी नहीं होता है !
    और रही जेल में चक्की पिसने की बात तो वहां भी सीधे तौर पर देश के उत्पादन में सहयोग दूंगा ! आपकी तरह मुफ्त की रोटी नहीं तोडूंगा #
    हर स्थिति में जय भारत की ही होगी,!!! बस एक ही धुन जय - जय भारत !!

    !! ॐ नमो हनुमते रामदूताय नमः !!

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  10. bhai kahar dha rahe ho, yeh hi dhaar bani rahe (par jaisa ki maine aapko mail en likha tha baat ko rakhne men shabdo ka dhyaan rakhne ki jaroorat hai kyon ki arth ka anarth ho raha hai, baat sandarbh se hatkar kuch or hi kah jaati hai,)

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  11. yaar ek baat to sahi hai ki Jai Bharat ke chakkar me Kam se kam Hanumaan ji ko atak=nkwadi ka photo lagakar compare mat karo. age aapki ichcha

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  12. सभी पाठकों से अनुरोध है की कृपा करके निम्न ब्लॉग को पढ़ने के बाद ही अपनी प्रतिक्रिया दें -

    http://vedquran.blogspot.com/2010/04/84-pratul-vasistha-said.html

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  13. डा. अनवर जमाल जी ने अपने ब्लॉग के पोस्ट में (http://vedquran.blogspot.com/2010/04/84-pratul-vasistha-said.html)
    कुछ इस तरह लिखा -

    आप जिस समय कमेन्ट कर रहे थे उस समय न्यूज़ चैनल्स अब तक के सबसे बड़े नक्सली हमले की कवरेज दिखा रहे थे । क्या ये मुसलमान हैं ?

    अब इतिहास की सुनिये - रावण स्वर्ग पर हमला करके इन्द्र और कुबेर को पकड़ लाया । रावण किसका पुजारी था ? वह किस जाति का था ?

    हनुमान जी ने कोटि कोटि लंकावासियों को जला डाला । वे जलने वाले किस धर्म के थे ? और वे मासूम नागरिक किस जुर्म में जलाये गये ?वह जलाने वह किस धर्म का था ?

    राक्षस आये दिन विश्वामित्र के यज्ञों में विध्वंस करते रहते थे ?

    सतयुग में भी हथियारों के प्रयोग और रक्तपात का विवरण मिलता है । तब तो मुसलमान लफ़्ज़ तक आर्यावर्त में न मिलता था । हर चीज़ में महानता का टाइटिल हथियाने वालो अब बताओ कि सबसे प्राचीन और सबसे बड़ा आतंकवादी कौन है ?

    ==================================================================================================================================================================================================================================================================================================================================================== इस प्रकार उन्होंने घूमा - फिर कर हनुमान जी को प्राचीन आतंकवादी घोषित कर दिया और किसी ने भी विरोध नहीं किया !

    यदि हमने - रामचरितमानस (सुन्दरकाण्ड) - साधु अवग्या कर फलु ऐसा | जरइ नगर अनाथ कर जैसा ||

    ऐसा लिखा तो क्या गलत लिख दिया !

    विषय को समझे बिना प्रतिक्रिया ना ही दें तो अच्छा है !

    शीर्षक लिखना मेरे मजबूरी थी क्योंकि बिना ऐसा लिखे तो आप यह जानने आते नहीं की आखिर माजरा क्या है !!

    !!!! बस एक ही धुन जय-जय भारत !!!!!

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  14. पंकज जी आपने कुछ हद तक सही लिखा है पर आपसे अनुरोध है की आतंकवादी वाली फोटो हटा दे क्योकि इससे हनुमान जी का घोर अपमान हो रहा है |

    आसा करता हु की आप ऐसा करेंगे |

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  15. एक कहावत है : किसी जाट से एक तेली ने कहा - जाट रे जाट तेरे सर पर khaat. जाट ने जवाब में कहा - तेली रे तेली तेरे सर पर कोल्हू. तेली बोला की तुक नहीं मिली तो जाट ने जवाब दिया की तुक मिले या न मिले बोझ तो मरेगा ही.
    ब्लॉगिंग एक माध्यम है विचारों के आदान प्रदान का, समस्याओं के समाधान में सहायक होने का तथा परस्पर भाईचारे को बढ़ाने का. इसलिए आवश्यक है की इसको माध्यम न बनाया जाये गन्दी मानसिकता को बढ़ावा देने का, समस्याओं को उलझाने का और गंदे कटाक्ष करके अपनी असली पहचान ज़ाहिर करने का. इसलिए ज़रुरत है सन्दर्भ से हटकर बात कहने से बचने की, यदि बात ठीक हो तो मान लेने की तथा शालीनता बनाये रखने की.

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  16. ye jo tumne hanuman ko badnaam karne ki harkat ki ha to mujhe tum par gussa nahi taras aa raha ha kyonki ye tum nahi tumhari gandi soch bol rahi ha ki hanuman ji ek atankvadi they tum jase pathbhrasht dhongi deshbhaqt hi is desh or is sanatan dharm arthat hindu dharm or uske devi devta ko klankit kar rahe ha or may ye dave se kehta hun ki tum kisi shaleen hindu parivar se nahi balki kisi aese dharm se sambhandhit parivar se ho jo hindu dharm virodhi hoga mujhe tumhari maa ke upar gussa aa raha ha jisne tumhe paida kar ke hindu dharm ki sahi vyakha nahi batai ki hindu kis cheez ka naam he zara apni durbudhi ko tyag or hindu dharm ke baaren main acchhi tarah gahan adhyayan kar agar tune vastav may man se pada to fir tujhe apne apse itni nafrat ho jayegi ki tu ram bhakt se apne liye aisi mritu mangega jo kisi ko na mili hogi unke bare may kuch bhi kehne se pehle soch lena fir bolna aaj to sahi marg dikha or sujha raha hun agar fir bhi nahi mana to ek baap ki aulad ho to aa jana kabhi maidan may yadi ram bhakt ki icchha hogi to aisi shiksha dunga ki tu apne paida hone par apne maa-baap ko kosega samjha kyonki ter liye to shri ram bhakt hanuman ka ek tucchh sewak hi kafi ha yadi tu hindu ha to tere jaise hindu par so so baar lanat ha aur yadi tu koi or ha to tere liye hamare hindu dharm may ek hi kahavat ha ki "vinashkaale budhi viprit". kisi asli hindu ki aulad ha to apni is galti ka pashchatap kis hanuman mandir may jaa kar karle wo bahut hi dyalu ka teri durbudhi ko sadbudhi may jarur badal denge. JAI SHRI RAM JAI SHRI RAM BHAKT HANUMAN JAI SHRI BALA JI.

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अभी और बहुत-सी महान उपलब्धियां और विजयोत्सव हमारी प्रतीक्षा में हैं