आध्यात्मिक राष्ट्रवाद सदस्य

गुरुवार, 22 अप्रैल 2010

क्या कहें अब दया निधान इंसानों की दुनिया इन बेचारे पशुओं का क्या काम ?

पशु वधशाला देवनार मुंबई के पास है.इस वध घर में लगभग औसत हर रोज 4000 पशु मारे जा रहे हैं. लेकिन अब हमारी सरकार इस बूचड़खाने को विस्तारित कर रही है जिसके द्वारा लगभग 14000 हर रोज और हर साल लगभग 3.6 लाख निरीह पशुओं को मारा जाएगा. वाह रे विस्तार !! क्या कहें अब दया निधान इंसानों की दुनिया इन बेचारे पशुओं का क्या काम ? जरूरत तो पहले कभी हुआ करती थी !!!

चलिए अब मनुष्य की करुना और उसके करुणा पात्रों के कुछ चित्र ही देख लें !! आखिर इसके सिवा हम कर भी क्या सकते हैं ( '_' )





























































4 टिप्‍पणियां:

  1. अब क्यों हमे बेशर्म पे बेशर्म किये जा रहे हो ठाकुर साहब!वैसे ही जीना मुश्किल हुआ जाता है!

    कुंवर जी,

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  2. चलिए अब मनुष्य की करुना और उसके करुणा पात्रों के कुछ चित्र ही देख लें !! आखिर इसके सिवा हम कर भी क्या सकते हैं ( '_' )

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  3. कुंवर जी क्या करूँ एक किताब हाथ लगी है भारत २०१०, पशु धन के बारे में इतना लिखा है की पढ़ कर बेशर्मी का मन कर ही गया !

    मौका मिले तो तो आप भी पढ़ लीजियेगा - लिंक नीचे है -

    http://www.scribd.com/doc/30334658/Bharat-2010

    http://www.scribd.com/forallover

    पंकज सिंह राजपूत

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  4. हृदयविदारक सूचना दी है आपने…। किसी राष्ट्रवादी NGO अथवा किसी सामाजिक कार्यकर्ता से सम्पर्क करके समविचारी लोगों को एकत्रित कीजिये और कोर्ट मे स्टे के लिये आवेदन कीजिये…। कुछ समय के लिये ही सही, रोक लगेगी, वरना "सेकुलर" सरकार तो जो करना है वह करके रहेगी…

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अभी और बहुत-सी महान उपलब्धियां और विजयोत्सव हमारी प्रतीक्षा में हैं