आध्यात्मिक राष्ट्रवाद सदस्य

सोमवार, 26 जुलाई 2010

रंगरंगीली, छैलछबीली. तितलीनुमा परियों से कभी राष्ट्र का नव निर्माण न हो सकेगा


राजर्षि जनक की महती सभा में ब्रह्मा ज्ञान की चर्चा हो रही थी ! जनक ने घोषणा कि जो विद्वान अपने आप को ब्रह्मज्ञानी समझता हो वह बाहर खड़ी हुई रत्नाजडित १ लाख गौओं को हांक ले जाए ! विख्यात मुनि याज्ञवल्क्य उठे और अपने शिष्य से बोले- बाहर खड़ी गौओं को आश्रम ले चलो ! याज्ञवल्क्य की वाणी से सभा में सन्नाटा छा गया, ऐसा लगा जैसे और कोई ब्रह्मज्ञानी वहां है ही नहीं, परन्तु उसी समय गार्गी खड़ी हो गई और मुनि से ब्रह्मज्ञानी होने का प्रमाण माँगा और मुनि के सम्मुख ब्रह्म के प्रश्नों की झड़ी लगा दी, मुनि कुछ देर तक तो जबाब देते रहें, परन्तु अंत: उन्होंने कहा की ब्रह्म अनंत है और उसका ज्ञान भी अनंत है इसलिए गार्गी तू और प्रश्न ना पूछ !
तू भी ब्रह्मज्ञानी है - इसमें कोई नहीं संदेह है !!!
यह है वैदिक नारी की एक भव्यतम झांकी 

और आज की भारतीय नारी को आरक्षण की बैशाखी का सहारा