आध्यात्मिक राष्ट्रवाद सदस्य

रविवार, 12 सितंबर 2010

स्वामी विवेकानंद की आदर्श राज्य की परिकल्पना

स्वामीजी ने वर्ण व्यवस्था का ऐतिहासिक विश्लेषण करते हुए कहा था कि मानव समाज में चारों वर्ण - ब्राह्मण अथवा पुरोहित वर्ग, क्षत्रिय अथवा सैनिक वर्ग, वैश्य अथवा व्यापारी वर्ग तथा शूद्र अथवा सेवक वर्ग बारी-बारी से राज्य करते हैं! प्रत्येक वर्ण के राज्य के अपने-अपने गुण तथा दोष होते हैं!

ब्राह्मण वर्ण के राज्य के अंतर्गत जन्म के आधार पर समाज में भयंकर पृथकता रहती है! ब्राह्मणों अथवा पुरोहितो का वर्ग विशेषाधिकारों से सुरक्षित रहता है!
शिक्षा पर ब्राह्मण वर्ण का नियंत्रण हो जाता है! समाज को शिक्षा देने का उसका अधिकार सुरक्षित रहता है! अतः समाज के अन्य वर्ग ज्ञान से वंचित रह जाते हैं! इस काल में विभिन्न प्रकार की विद्याओं तथा कलाओं की नींव पड़ती है!


इसके पश्चात क्षत्रिय राज्य आता है जो क्रूर, निरंकुश तथा अन्यायी होता है! ऐसे राज्य में पृथकता नहीं होती है, परन्तु कलाएं और सभ्यता उन्नति के चरमशिखर पर पहुँच जाती हैं!

इसके पश्चात वैश्य-राज्य आता है, इस राज्य में शोषण तथा खून-चूसने कि प्रवृति पनपती है! व्यापार तथा कारोबार फलता-फूलता है! प्रकृति का भी अत्यधिक शोषण होता है! व्यापारी वर्ग ब्राह्मण तथा क्षत्रिय राज्य में उपलब्धियों तथा विचारों का प्रसार करता है! वैश्य राज्य में क्षत्रिय राज्य से कम पृथकता होती है, परन्तु सभ्यता कि अवनति आरम्भ हो जाती है!
सबसे अंत में शूद्र अथवा सेवक वर्ग(मजदूर वर्ग)का राज्य आएगा! इसके अंतर्गत भौतिक सुख-सुविधाओं का सामान वितरण होगा तथा इससे सेवक और मजदूर वर्ग कि आर्थिक स्थिति में सुधार होगा! शिक्षा का प्रसार होगा तथा यह सामान्य व्यक्ति तक पहुंचेगी! परन्तु इस राज्य में प्रतिभाशाली लोग कम होते जायेंगे तथा सभ्यता का स्तर गिरेगा!!

स्वामी विवेकानंद ने आदर्श-राज्य की परिकल्पना करते हुए कहा था कि यदि ऐसे राज्य की स्थापना संभव हो जिसमें ब्राह्मण राज्य का ज्ञान, क्षत्रिय राज्य की सभ्यता, वैश्य-राज्य का व्यापार तथा प्रचार तथा शूद्र राज्य की समानता हो तो वह आदर्श राज्य होगा!

उन्होंने भविष्यवाणी करते हुए कहा था कि उपरोक्त तीन वर्णों का राज्य हो चुका है, अब शूद्र अथवा मजदूर वर्ग के राज्य का समय आ गया है! उन्हें कोई रोक नहीं सकता! (लोकतंत्र इसी वर्ण के राज्य का प्रारूप है जो अब विश्व के लगभग सभी देशों में अपनी जगह बनाता जा रहा है)

परन्तु यदि चारों वर्णों के राज्यों की अच्छाइयों को लेकर आदर्श राज्य की स्थापना हो सके तो यह ही सबसे अच्छा होगा !!!


प्रस्तुतकर्ता - पंकज सिंह राजपूत

!!! बस एक ही धुन जय-जय भारत !!!

2 टिप्‍पणियां:

अभी और बहुत-सी महान उपलब्धियां और विजयोत्सव हमारी प्रतीक्षा में हैं