आध्यात्मिक राष्ट्रवाद सदस्य

बुधवार, 12 जनवरी 2011

जो इश्वर मुझे यहाँ रोटी नहीं दे सकता, वो मुझे स्वर्ग में अनंत सुख कैसे दे सकेगा

भारत को ऊपर उठाया जाना हैं ! गरीबों की भूख मिटाई जानी हैं ! शिक्षा का प्रसार किया जाना है ! पंडे पुरोहितो और धर्म के ठेकेदारों को हटाया जाना है ! हमने पंडे पुरोहित और धर्म के ठेकेदार नहीं चाहिए ! हमें सामाजिक आतंक नहीं चाहिए !

हमें तो हरेक के लिए रोटी , हरेक के लिए काम की अधिक सुविधाएँ चाहिए !

जनता के आध्यात्मिक उत्थान की एक ही शर्त है, आर्थिक और राजनीतिक पुनर्निर्माण !

भूखे हमसे रोटी मंगाते हैं और हम उन्हें लोक परलोक में उलझा देते हैं, कहा जाता है कि इस लोक में दुःख सहोगे तो परलोक में सुख भोगोगे, उन्हें कर्म और भाग्य के एक ऐसे सिद्धांत में उलझा दिया जाता है, जिससे बाहर आने का को मार्ग ही नहीं है !


परन्तु जो इश्वर मुझे यहाँ रोटी नहीं दे सकता, वो मुझे स्वर्ग में अनंत सुख कैसे दे सकेगा


भूख से पीड़ित जनों के गले में धर्म उडेलना, उनका अपमान करना है !  भूख और मूलभूत सुविधाओं से रहित व्यक्ति को धार्मिक सिद्दांतों के घुट्टी पिलाना, उसके आत्म सम्मान पर आघात करना है !!

किसी के कह देने मात्र से अन्धों के तरह करोड़ों देवी - देवताओ पर अंध विश्वास न करो !

साहसी और आत्मविश्वासी बनों ! मजबूत बनो !! कायर और लिबलिबे न बने रहो !! 

भारत को कायरों और स्वार्थियों के जरूरत नहीं है, बहुत है यहाँ पर !

आज हमारे देश को जिस चीज की आवश्यकता है, वह है दृढ इच्छा शक्ति, इस्पात जैसी मांस-पेशियाँ और मजबूत स्नायु  - जिन्हें कोई ताकत रोक या झुका न सके, जो यदि जरूरी हो तो सागर की अतल गहराइयों में भी अपने लक्ष्य की पूर्ती के लिए मौत का मुकाबला करने को तैयार रहें ! 

ये न कहो की यहाँ संसार में कुछ करने के लिए नहीं है - कूद पडो कर्म के युद्ध में, सार्थक कर्मों की राष्ट्र की अभिलाषा को पूर्ण करों ! राष्ट्र और राष्ट्र का भविष्य तुम्हारी ओर देख रहा है ..... सत्य की  स्थापना के लिए सत्य के बल की ही आवश्यकता है ! 
बहुत रो धो चुके हैं हम, अब हमें कर्म के धर्म की आवश्यकता है, क्योंकि इसी से मानवता का कल्याण और राष्ट्र का उद्धार संभव है !!!!!

१२ जनवरी -
स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस अर्थात  राष्ट्रीय युवा दिवस पर देश के युवाओं को स्वामी जी का सन्देश

7 टिप्‍पणियां:

  1. परन्तु जो इश्वर मुझे यहाँ रोटी नहीं दे सकता, वो मुझे स्वर्ग में अनंत सुख कैसे दे सकेगा..
    .


    इश्वेर सभी को बराबर से तोती देता है यह हम हैं जो अपने जैसों का हक मार देते हैं और सवाल इश्वेर कि अदालत पे उठाते हैं.

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  2. प्रिय,

    भारतीय ब्लॉग अग्रीगेटरों की दुर्दशा को देखते हुए, हमने एक ब्लॉग अग्रीगेटर बनाया है| आप अपना ब्लॉग सम्मिलित कर के इसके विकास में योगदान दें - धन्यवाद|

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  3. आप को पता हो स्वामी विवेकानंद के गुरु राम कर्ष्ण परम हंस स्वयं एक बड़े पंडित ,तांत्रिक एवम कर्म कांडी थे |इतने बड़े गुरु के चेले स्वामी विवेकानंद हिन्दू धर्म के हर पक्ष के प्रति पूरी समानीय राय रखते थे केवल दिखावे के अलावा |आप की पोस्ट का शीर्षक झूठा हे ?

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  4. @ प्रिय Man जी

    आपके विचारों के लिए धन्यवाद !!

    यदि आपने स्वामी जी के राजनितिक दर्शन न पढ़ा हो तो पढ़ लें !!!

    स्वामी जी का आध्यात्मिक दर्शन -

    आत्मा की न कोई जाति है, न धर्म है !!!

    वैसे भी वे तो अद्वैत में आस्था रखते थे !!!
    +++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++

    माँ जगदम्बे गढ़ कालका धार भवानी का सेवक और उनका पुत्र से छोटा सा प्रश्न -

    माँ कालका मांस क्यों स्वीकार करती हैं ?

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  5. प्रिय पंकज जी ,आप का स्वागत हे ,इश्वर के अस्तित्व को नकार के वामपंथियों ने कर्म किये थे आज उनकी विचार धारा ही खात्मे के कगार पे हे ,और मावोवादी भी सद्कर्म कर रहे हे ?इश्वर के अस्तिअव को नकार के उस पे ऊँगली उठा के कोई रास्ट्र और व्यक्ति सुखी नहीं रह सकता |कालका के कई रूप हे ,धार कालका प्राचीन शक्ति पीठ हे जो की राजा भोज ने देवी सेवा शुष्मा शुरू की थी|इस भवानी के मांस नहीं चढ़ाया जाता हे ये पंवार वंशजो की कुलदेवी हे | केवल काल भेरव के बकरों की बलि दी जाती हे |आप को पता हो देवी के आगे बालाजी चलते हे सात्विकता के पर्तीक हे और पीछे भेरव जी चलते इस मत को पुष्ट करते हे के राक्षसों को मारने के लिए तामसिक रूप भी धारण करना पड़ता हे लोहे की काट लोहा ही होती हे |होलीवूड की मूवी वेनहेल्ल्सिंग और 30 day,s night देखना आप को और ज्यादा किलियर हो जायेगा |तामसिक शक्तिओ का भोजन मांस ही होता हे |फिर और आप को ज्यादा पता

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  6. रोटी ईश्वर से मांगोगे तो खुद क्या करोगे ? हाँ ईश्वर स्वर्ग दे सकता है | क्यूंकि स्वर्ग में भूँख और प्यास नहीं लगती है | स्वर्ग और स्वर्ग की अप्सराओं की कहानियाँ तो तुमने सुनी होंगी | मेनका-विश्वामित्र, उर्वशी-प्रुरुरवा, | और जब यह अप्सरा पृथ्वी पर आती हैं तो आदमी रोटी पानी भूल जाता है | तो स्वर्ग की बात ही क्या कहनी | और ईश्वर का स्वर्ग मांगने से नहीं मिलता है | वह तपस्या करने से मिलता है |

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अभी और बहुत-सी महान उपलब्धियां और विजयोत्सव हमारी प्रतीक्षा में हैं