आध्यात्मिक राष्ट्रवाद सदस्य

बुधवार, 26 जनवरी 2011

भारतीय संविधान उधार का थैला है

भारत के संविधान निर्माता जनता के समक्ष कोई मौलिक या अभूतपूर्व संविधान प्रस्तुत नहीं करना चाहते थे, उनका उद्देश्य तो एक व्यावहारिक और अच्छा संविधान बनाना था इसलिए उन्होंने संसार के प्रमुख और सफल संविधानों का गहन अध्ययन किया और उनसे भारतीय परिस्थितियों के लिए लाभदायक तत्वों को बिना हिचक स्वीकार कर लिया ! फलस्वरूप भारतीय संविधान संसार के विभिन्न संविधानों का सम्मिश्रण हो गया !

भारतीय संविधान पर प्रभाव डालने वाले प्रमुख संविधान -- 
सन 1935 का भारतीय सरकार अधिनियम - भारत के वर्तमान संविधान पर 1935 का भारतीय सरकार अधिनियम की स्पष्ट छाप दिखाई देती है ! संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची, केंद्र तथा राज्यों के पारस्परिक सम्बन्ध, राष्ट्रपति के संकटकालीन अधिकार आदि से सम्बंधित प्रावधानों को धोडे बहुत परिवर्तनों के साथ जैसा था वैसा ही ले लिया गया ! भारतीय संविधान में अब कुछ नया था तो वह था व्यस्क मताधिकार !!
                      1935 का भारतीय सरकार अधिनियम के अंतर्गत गवर्नर जनरल और गवर्नर स्वेच्छाचारी और निरंकुश थे, परन्तु हमारे संविधान में राष्ट्रपति और राज्यपाल केवल संवैधानिक प्रमुख ही हैं ! सारी महत्वपूर्ण शक्तियां प्रधानमन्त्री और मुख्यमंत्रियों में विभाजित की गयी हैं !
                  1935 का भारतीय सरकार अधिनियम ब्रिटिश संसद का अधिनियन था जो भारतीय जनता पर थोपा गया था, जबकि हमारा नया संविधान जनता के प्रतिनिधियों द्वारा अपनाया गया था, इसमें मौलिक अधिकारों को शामिल किया गया था !!
                                 परन्तु 1935 का भारतीय सरकार अधिनियम का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार द्वार अपने ब्रिटिश राज्य को सजीव और सुरक्षित बनाये रखना था और ऐसे में सभी महत्वपूर्ण कानूनों की नक़ल के कारण देश में भ्रष्टाचार और नौतिक पतन आदि समस्याए तेजी से बढ़ी हैं !!

ब्रिटिश का संविधान - संविधान की समस्त संसदीय स्वरुप और उसके क्रियान्वयन के नियमों को ब्रिटिश संविधान तथा उसकी परम्परों से लिया गया है !
क्या ब्रिटिश संसदीय नियम भारतीयों के लिए पूर्ण रूप से अनुकूल हो सकते हैं ? 
क्या इनमे बदलाव नहीं किये जा सकता है ?

अमेरिका का संविधान - भारतीय संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकार, सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा संविधान की रक्षा,  उपराष्ट्रपति का पद व उसके कार्य और संविधान संसोधन प्रक्रिया पर अमेरिकी संविधान की छाप है ! 

आयरलैंड का संविधान - संविधान के राज्य के नीति-निदेशक तत्व, राष्ट्रपति के निर्वाचन में निर्वाचक मंडल का  उपबंध और द्वितीय सदन (राज्यसभा) में साहित्य, कला, विज्ञान, और समाज-सेवा के क्षेत्रों से विशिष्ट व्यक्तियों की नामजदगी की प्रदाली आयरलैंड के संविधान की नक़ल है !

कनाडा का संविधान - कनाडा के सामान ही भारत संघ बना है ! कनाडा के संविधान के आदर्श पर भारतीय संघ को भी यूनियन (UNION) का नाम दिया गया है और कनाडा की तरह भारत में भी अवशिष्ट शक्तियां केंद्र सरकार को ही प्रदान की गई हैं !

आस्ट्रलिया का संविधान - संविधान की प्रस्तावना के भाव व् भाषा समवर्ती सूची तथा इस सूची से सम्बंधित केंद्र और राज्य के पारस्परिक झगडों को निपटाने की प्रणाली को बहुत कुछ आस्ट्रलिया के संविधान से लिया गया है !!

दक्षिण अफ्रीका का संविधान - भारतीय संविधान में संशोधन की प्रक्रिया को दक्षिणी अफ्रीका के संविधान से ग्रहण किया गया है !! 

हमारे संविधान निर्माताओं ने विदेशी संविधान के केवल उन्ही प्रावधानों के को लिया है, जो वहाँ सफल सिद्ध हो चुके थे और हमारे देश के परिस्थितियों के अनुकूल थे !
इस प्रकार के मिश्रण से जो संविधान सामने आया वह मूल रूप से भारत का संविधान था !
निश्चय ही संविधान निर्माता अपने उद्देश्य में सफल हुए !!
परन्तु ! काश !!
उन्होंने नक़ल के साथ-साथ कुछ अपना भी बनाया होता तो शायद मेरे देश की यह दुर्गति न होती और आज हम विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक, राजनितिक, आध्यात्मिक, सामरिक और सामाजिक शक्ति होते !!!???

2 टिप्‍पणियां:

  1. माफ करिएगा मैं आपसे सहमत नहीं.
    कमी संविधान में नहीं है समाज में हैं जिसमें शासित व शासक दोनों ही सम्मिलित हैं....वर्ना दूसरी तरफ ब्रिटेन बिना किसी लंबी-चौड़ी कठोर लिखा-पढ़ी वाले तथाकथित संविधान के ही आजतक चला आ रहा है

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  2. काजल जी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद !

    मैं यहाँ अपने संविधान में कमियां नहीं निकाल रहा हूँ !!

    अब बात रही इंग्लॅण्ड की तो वहाँ की शिक्षा दर आप जानते ही होंगे और भारत की भी !!

    संविधान पढ़े लिखों का होता अनपढों का नहीं यह जानते हुए भी संविधान में शिक्षा के प्रसार की निति क्यों नहीं बनी !
    भारत सरकार की पहली शिक्षा निति १९६२ में आई !!

    संसद पर हमला करने वाला अभी तक मजे क्यों लूट रहा है - संविधान के प्रावधानों के कारण !!!

    बलात्कार के दोषी को कितनी सजा मिलती है, उतनी ही जितनी अंग्रेजों के शासन में मिलती थी >>>>>>>

    अगर सब कुछ ठीक होता तो इतना सारा काला धन विदेशों में ण जमा होता ........

    काफी हद तक आपकी बात भी ठीक ही है - कमी संविधान में नहीं है समाज में हैं जिसमें शासित व शासक दोनों ही सम्मिलित हैं

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अभी और बहुत-सी महान उपलब्धियां और विजयोत्सव हमारी प्रतीक्षा में हैं