आध्यात्मिक राष्ट्रवाद सदस्य

बुधवार, 10 अगस्त 2011

रामदेव या अन्ना!

प्रश्न ये है की रामदेव और अन्ना दोनों ही एक अच्छे उदेश्य के लिए आन्दोलन कर रहे है! लेकिन दोनों की हीराहे एक दुसरे जे जुदा या अलग क्यों है! जहाँ शुरू मे बाबा रामदेव ने अन्ना का साथ दिया वन्ही अन्ना ने पहले ही दिन से बाबा के आन्दोलन से दूरी बना ली! क्योंकि उनके मंच पर कुछ सांप्रदायिक लोग पहुँच गए! जबकिबाबा के मंच पर ऐसे भी लोग थे जो एक अच्छे उदेश्य के लिए इकट्ठा हुए थे !


 और स्वतंत्र भारत मे सभी को अपनी राय देना का हक है चाहे वो धार्मिक हो या राजनातिक हो! आप किसी भी व्यक्ति की बहिष्कार इसलिए नहीं कर सकते की वो धार्मिक है या राजनातिक है! एक ही विषय पर एक ही संगठन के लोगो की बातें या उनकेविचार अलग हो सकते है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है की संगठन को समाप्त ही कर दिया जाये !

अब बात करते है असली मुद्दों की, की रामदेव या अन्ना के आन्दोलन मे सबसे ज्यादा असरदार आन्दोलन किसका है !
१. रामदेव बात करते है काले धन पर, भ्रष्टाचार पर, स्वदेशी पर, स्व-रोजगार पर. जबकि अन्ना बात करते हैसिर्फ भ्रष्टाचार पर.
क्या भ्रष्टाचार को समाप्त करने से ये सभी समस्याएँ समाप्त हो जाएँगी, नहीं होंगी क्योंकि सिर्फ भ्रस्टाचार हटानेसे गरीबी दूर नहीं होगी.

२. रामदेव ने अपनी बात जो की आन्दोलन से जुडी हुई है देश के उस कोने तक पहुंचाई है जन्हा देश की आत्मा बस्ती है यानि की गाँव तक, जबकि अन्ना के आन्दोलन से जुड़ा हुआ है सिर्फ और सिर्फ शहरी व्यक्ति जो सिर्फ कभी-कभी इस भ्रष्ट तंत्र की चपेट मे आता है, जबकि ग्रामीण व्यक्ति हर रोज भ्रष्टाचार से आमना -सामना करता है.
क्या भ्रष्टाचार को समाप्त करने से गाँवो का विकास हो सकता है ! नहीं होगा क्योंकि इतने घोटाले करके जो पैसा विदेशो मे भेज दिया अगर वो देश मे आये तो कुछ हो सकता है !

३. अन्ना सिर्फ बात करते है भ्रस्टाचार पर रोक की लेकिन जो पैसा भ्रस्टाचार करके विदेशो मे भेज दिया क्या वो देश का नहीं है! क्या उस पर हम जैसे करोडो कर देने वालो का कोई हक नहीं है! रामदेव इसी पैसे की वापस लाकर इससे विकास करने की बात करते है और यही एक गलत बात है जो वो करते है क्योंकि सरकार ये नहीं चाहती की वो पैसा वापस आये.
क्या विकास कोई बुरी बात है क्या ये अच्छा नहीं होगा की हमारे देश मे कोई गरीब नहीं होगा ! कोई व्यक्ति रात की भूखा नहीं सोयेगा! हमारे देश के नन्हे बच्चो को मजदूरी नहीं करनी पड़ेगी.

४. किसी भी आन्दोलन को किसी धार्मिक संगठन के समर्थन दे देने से ये साबित नहीं हो सकता की वो आन्दोलन समाप्त हो जायेगा! हमारी आत्मा हमारे संस्कारो मे बसती है और अगर हम अपने संस्कारो को अच्छे से निर्वाह करे तो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की कौन समर्थन दे रहा है और कौन नहीं ! अन्ना अपने मंच से हिन्दू धार्मिक लोगो को भगा देते है भारत माता का चित्र हटा देते है और अपने मंच पर स्वागत करते है देश के विभाजन करने की बात करने वालो को, स्वागत करते है मओवादियो का समर्थन करने वालो का, समर्थन करते है एक धर्म विशेस को गलियां देने वाले लोगो को, अगर अन्ना को अपने आन्दोलन के लिए किसी की जरुरत ही नहीं थी खासकर हिंदूवादी सोच वालो के लिए तो फिर क्यों उन्होंने उन अधर्मियों की मंच पर जगह दी जो सिर्फ देश को बटने के कार्य करते है.

जबकि रामदेव ने सभी का आह्वान किया अपने आन्दोलन मे, सभी को सामिल किया किसी से जाती या धर्म नहीं पुछा गया, सिर्फ सहयोग माँगा गया उस आन्दोलन मे जो असलियत मे भारत की तस्वीर बदल देगा, बना देगा फिर से भारत को सोने की चिड़िया!मे व्यक्तिगत तौर पर न बाबा का समर्थक हूँ न अन्ना का विरोधी! लेकिन अगर बात मुद्दों की की जाये तो बाबा रामदेव के आन्दोलन मे वो आग थी जिससे सरकार को खुद एहसास हुआ की ये आग उसे जला देगी ! इसीलिए ४-४ मंत्री पहले अगवानी करते है फिर लाखो लोगो को रात को पिटवाते है! ये सिर्फ यही कहता है की सरकार को अगर डर है तो सिर्फ रामदेव के आन्दोलन से. अन्ना के आन्दोलन से कुछ फर्क नहीं पड़ता जिसके उद्हरण आप लोग देख ही चुके है संसद मे पेश सरकार की विधेयक और सरकार की मानसिकता आप देख चुके है आप की किस तरह से बाबा की परेशान किया जा रहा है हर रोज एक नया आरोप लगा दिया जाता है. 

अगर आप सोचते है की बाबा के पास इतनी दौलत है तो मे यही कहूँगा की बाबा ने इतनी इच्छा-शक्ति तो दिखाई की उन्होंने अपनी सम्पति को उजागर किया! क्या सरकार मे बैठे भ्रष्ट लोगो मे इतनी इच्छा-सकती है !मेरी दुआ है की बाबा और अन्ना जी एक मंच पर आये और इस भ्रस्ट तंत्र और इस भ्रस्ट सरकार से लोगो को निजात दिलाये. मे इस आन्दोलन मे बाबा और अन्ना के साथ हूँ.

जय हिंद.

Kuldeep Tyagi 

2 टिप्‍पणियां:

  1. भारत में अपने आपको सेकुलर साबित करने की बहुत बड़ी बीमारी ने अपने पैर जमा लिए है अन्ना एंड कम्पनी भी इसी बीमारी से ग्रस्त है साथ ही अग्निवेश जैसे कांग्रेस के छद्म दलाल अन्ना के साथ है वे अन्ना को कभी बाबा या राष्ट्रवादियों के साथ नहीं आने देंगे क्योंकि उन्हें भर्ष्टाचार से कोई मतलब नहीं वे तो अपनी राजनीती चमकाने में लगे है|
    way4host

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अभी और बहुत-सी महान उपलब्धियां और विजयोत्सव हमारी प्रतीक्षा में हैं