आध्यात्मिक राष्ट्रवाद सदस्य

मंगलवार, 25 अक्तूबर 2011

खरबूजा - चाक़ू : चाक़ू - खरबूजा

खरबूजा - चाक़ू : चाक़ू - खरबूजा आज देश करवट ले रहा है , नई सोच का वक्त चल रहा है , चिंतन - मनन , विचार - विमर्श न जाने और भी क्या क्या हो रहा है !


 " क्या - क्या " से मतलब जानने से पहले यह समझना अत्यावश्यक है : इतिहास गवाह है - जब भी बड़े अत्याचार का खात्मा हुआ है , 'बड़े' ने अपने स्वयं के अंत से पहले 'मातहतों' का अंत कराया है . रावण , कंस , कौरव .... किसी भी वंश के इतिहास को पढ़ लें - लगभग एक सी कहानी नज़र आयेगी . पुनः लेख की पहली पंक्ति पर आता हूँ ....... वर्तमान भी ऊहापोह मचा रहा है . वर्तमान " वंश " के कई 'मातहत' भी हवाहवाई हो रहे हैं , हाँ मातहतों की फेहरिस्त बड़ी लम्बी है .( रावण के कुल जमा २ भाई और थे उन में से भी एक शरणागत हो गया , परन्तु दुर्योधन के ९९ भाई और थे ,इनमेंसे भी एक ही शरणागत हुआ था ) वर्तमान वंश या यूं कहें " कुनबा " बहुत बहुत बहुत ...... लम्बा है ..... समय तो लगेगा ही ! चिल - पौं भी कुछ ज्यादा भी होगी , होनी भी चाहिए - कुनबा जो बड़ा है ! हाँ , इनकी ताक झाँक से क्षणिक परेशानियां भी आयेगी , हंसी भी आयेगी , गुस्सा भी आयेगा , रोना ...... सब कुछ होगा . लेकिन याद रक्खें : रात अंधेरी बाद चांदनी आती है ; धूप निकलते देख नींद उड़ जाती है . ध्यान रक्खें : वर्तमान कुनबे में से कोई " शरणागत " न आ जाय !!! अभी कई " हिसार " पार करने हैं , कई हरियाणा - बिहार - आंध्र - महाराष्ट्र फतह करने हैं . देखिये फतह तो करने ही पड़ेंगे क्योंकि साफ़ नज़र आ रहा है कि वर्तमान कहीं भी सुधरता नहीं दिख रहा . जब बिगाड़ आता है तो सागर के हिलोरे की तरह सब तरफ एकमेक ही हो जाता है , अब इसमे मीडिया हो या आम जन - हिलोरे तो एक जैसे ही लगते हैं ! भ्रमित करना ही तो एकमात्र लक्ष्य है !! भ्रम जाल से निकालना भी " वर्तमान " का ही तो काम है !!!!!!


 हाँ , शीर्षक की बात : चाकू के अवतार में तो हमेशा हमेशा " जनता " ही अवतरित होगी और खरबूजा रूपी रावण का ही अंत होगा . वैसे कुनबे का सपरिवार जाना न केवल श्रेयकर है बल्कि भविष्य के लिए हितकर भी है . और ठीक उसी तरह जा भी रहा है .......



लिखने वाले का नाम :      जुगल किशोर सोमाणी , जयपुरईमेल :      jugalkishoresomani@yahoo.co.in
स्थान :      जयपुरसमय :     Thursday, October 20, 2011 2:2
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